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Amit Shah

कूचबिहार की घटना को लेकर ममता ने की इस्तीफे की मांग, अमित शाह बोले- 'मैं तैयार हूं, बशर्ते...'


शाह ने कहा कि भाजपा बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों के आने पर पूरी तरह से रोक लगा देगी

खास बातें

  • ‘ममता को दो मई को मुख्यमंत्री का पद छोड़ना होगा’
  • ‘अवैध प्रवासी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं’
  • ‘भाजपा अवैध प्रवासियों के आने पर पूरी तरह से रोक लगा देगी’

बसीरहाट (पश्चिम बंगाल):

West Bengal assembly elections 2021: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने रविवार को कहा कि वह अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं, बशर्तें जब पश्चिम बंगाल के लोग उनसे ऐसा करने को कहें. भाजपा के वरिष्ठ नेता शाह ने हालांकि कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को दो मई को पद छोड़ना होगा क्योंकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) मौजूदा विधानसभा चुनाव (West Bengal assembly elections) हार जाएगी. टीएमसी प्रमुख बनर्जी ने शनिवार को कूचबिहार जिले के सीतलकूची में चौथे चरण के मतदान के दौरान सीआईएसएफ कर्मियों की गोलीबारी में चार व्यक्तियों के मारे जाने को लेकर शाह से इस्तीफे की मांग की थी. शाह ने उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘दीदी मेरा इस्तीफा मांग रही हैं. यदि पश्चिम बंगाल के लोग यह मांग करें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा, मैं अपना सिर झुकाकर ऐसा करने के लिए तैयार हूं. हालांकि, ममता को दो मई को मुख्यमंत्री का पद छोड़ना होगा.”

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पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए आठ चरणों में चुनाव होने के बाद दो मई को मतगणना होगी. शाह ने बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह अवैध प्रवासियों के तुष्टिकरण के लिए संशोधित नागरिकता कानून का विरोध कर रही हैं. शाह ने दावा किया कि अवैध प्रवासी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं और दंगों में लिप्त होते हैं.

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उन्होंने कहा, ‘‘यदि मतुआ समुदाय के लोगों को नागरिकता मिल जाए तो दीदी को क्या दिक्कत है? उनकी समस्या यह है कि अवैध प्रवासी नाराज हो जाएंगे. ऐसे लोगों को अब राज्य पर शासन करने का अधिकार नहीं है. अवैध प्रवासी मुफ्त राशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं लेकिन दंगों में लिप्त होते हैं.”

शाह ने कहा कि भाजपा बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों के आने पर पूरी तरह से रोक लगा देगी और राज्य में सरकार बनाने के बाद सीएए के खिलाफ विधानसभा में पारित प्रस्ताव वापस लेगी. उन्होंने लाभार्थियों को 10,000 रुपये की वार्षिक सहायता देने के लिए ‘‘मुख्यमंत्री शरणार्थी कल्याण कोष” शुरू करने का वादा भी किया.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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कूचबिहार हिंसा को लेकर ममता बनर्जी ने लगाया आरोप- कहा- 'ये अमित शाह की रची साजिश...'


ममता बनर्जी ने शांति बनाए रखने की अपील की (फाइल फोटो)

हिंगलगंज (पश्चिम बंगाल),:

 पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने लोगों से शांत रहने की शनिवार को अपील की और सीआईएसएफ (CISF) पर सीतलकूची में पंक्तिबद्ध खड़े मतदाताओं पर गोलियां चलाने का आरोप लगाया. बनर्जी ने यहां एक जनसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस बात का जवाब देने को कहा कि राज्य विधानसभा के चौथे चरण के मतदान के दौरान कूचबिहार (CoochBehar) जिले के सीतलकूची में केंद्रीय बलों की गोलीबारी में लोगों की जानें क्यों गईं. उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय बलों के ‘‘अत्याचार” को देखकर उन्हें काफी समय से ऐसा कुछ होने की आशंका थी. 

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मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इतने लोगों को मारने के बाद वे (निर्वाचन आयोग) कह रहे हैं कि आत्मरक्षा में गोलीबारी की गई. उन्हें शर्म आनी चाहिए. यह एक झूठ है.” बनर्जी ने कहा, ‘‘सीआईएसएफ ने मतदान के लिए पंक्ति में खड़े लोगों पर गोलीबारी की और सीतलकूची में चार लोगों को मार दिया. मुझे इस बात की लंबे समय से आशंका थी कि बल इस प्रकार की कार्रवाई करेंगे. भाजपा जानती है कि उसने लोगों का जनाधार खो दिया है, इसलिए वह लोगों को मारने का षड्यंत्र रच रही है.” उन्होंने आरोप लगाया कि यह शाह की रची साजिश का हिस्सा था. 

बनर्जी ने कहा, ‘‘बहरहाल, मैं सभी से शांत रहने और शांतिपूर्ण रूप से मतदान करने की अपील करूंगी. उन्हें हराकर मौत का बदला लें.” मुख्यमंत्री ने कहा कि इस चुनाव में मारे गए लोगों की संख्या तीन साल पहले हुए पंचायत चुनाव से कहीं अधिक है. उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप चुनाव की शुरूआत होने से ले कर अब तक मारे गए लोगों की कुल संख्या की गिनती करें, तो करीब 17-18 लोग मारे जा चुके हैं. कम से कम 12 लोग केवल हमारी पार्टी के थे.” 

बनर्जी ने कहा कि निर्वाचन आयोग को आज हुई घटना को लेकर लोगों को स्पष्टीकरण देना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रशासन के प्रभारी नहीं हैं. आयोग प्रशासन का प्रभारी है.” बनर्जी ने कहा, ‘‘उन्होंने वरिष्ठ आईपीएस सुरजीत कर पुरकायस्थ को हटा दिया. उन्होंने आरपीएफ से कनिष्ठ दर्जे के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं मेरे ओएसडी अशोक चक्रवर्ती को हटा दिया. फिर भी निर्वाचन आयोग चुनाव की निगरानी के लिए यहां सेवानिवृत्त अधिकारियों को ला रहा है.”

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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आज थम जाएगा चुनाव प्रचार को शोर, चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मंगलवार को डाले जाएंगे वोट


प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली:
असम, तमिलनाडु, केरल, बंगाल और पुड्डुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का आज आखिरी दिन है. आज पांचों जगह चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा. इन पांचों जगह मंगलवार को वोट डाले जाएंगे. असम और बंगाल में तीसरे चरण का मतदान है, जबकि तमिलनाडु, केरल और पुड्डुचेरी में एक ही चरण में वोट डाले जाएंगे.

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  1. केरल में पूरे राज्य में 27 लाख मतदाता हैं. सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट, द यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, जिसका कांग्रेस हिस्सा है और भाजपा  मुख्य रूप से चुनावी मैदान में हैं. राज्य की 140 विधानसभा सीटों पर इन तीनों के बीच कड़ी टक्कर है.

  2. केरल के वायनाड से लोकसभा सांसद कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज राज्य में चुनाव प्रचार करेंगे.

  3. असम में भाजपा नेता और मंत्री हेमंत बिस्वा प्रचार पर बैन खत्म होने के बाद दोबारा से चुनाव प्रचार शुरू करेंगे. उन पर बीपीएफ प्रमुख हाग्रामा मोहिलारी को जेल भेजने की धमकी देने पर बैन लगाया गया था. बीपीएफ पहले भाजपा की ही सहयोगी पार्टी थी. असम की 40 सीटों पर मंगलवार को मतदान होगा.

  4. तमिलनाडु में पिछले कुछ सप्ताह में जोर-शोर से चुनाव प्रचार देखने को मिला. राज्य की 234 सीटों पर मंगलवार को वोट डाले जाएंगे.एआईएडीएमके-बीजेपी, डीएमके-कांग्रेस, कमल हासन की मक्कल नीधि मय्यम और टीटीवी दिनाकरण की अम्मा मक्कल मुनेत्र काजगाव मैदान में हैं. 

  5. मंगलवार को पुड्डुचेरी की 30 सीटों पर भी चुनाव हैं. दो महीने पहले यहां वी नारायणसामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने बहुमत खो दिया था. नारायणसामी ने इसके लिए  विपक्षी दल भाजपा और एनआर कांग्रेस पर सरकार गिराने का आरोप लगाया था.

  6. पुड्डुचेरी में छह अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान रविवार शाम सात बजे थम जाएगा. इस संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत एक आदेश जारी किया गया है. हालांकि, प्रतिबंध के दौरान घर-घर जाकर प्रचार करने  पर मनाही नहीं है. 30 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 324 उम्मीदवार मैदान में हैं. 

  7. बंगाल में मंगलवार को तीसरे चरण का मतदान है. बंगाल में टीएमसी और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. वहीं कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन भी मैदान में है. 

  8. भाजपा ने बंगाल चुनाव में पूरा जोर लगा दिया है. आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बांगाल में भाजपा के लिए प्रचार करेंगे.

  9. पिछले सप्ताह बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस सोनिया गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और अन्य विपक्षी पार्टियों से भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी. 

  10. चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में जारी विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रचार अभियान का नेतृत्व करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक 23 रैलियां कर चुके हैं. इनमें से 10 रैलियां तो चार राज्यों में उन्होंने पिछले तीन दिनों में संबोधित की हैं. इनमें शनिवार का दिन भी शामिल है. भाजपा पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर करने और असम में सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरा जोर लगा रही है और ये दोनों ही राज्य मोदी के प्रचार अभियान के केंद्र में हैं.



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Assam Assembly elections | Rahul guarantees Nagpur control-free State


Congress leader Rahul Gandhi on Wednesday added a sixth guarantee to the party’s declared five in its election manifesto — to free Assam from the control of Delhi and Nagpur.

‘Nagpur’ is a reference to the Rashtriya Swayamsevak Sangh’s headquarters while the Congress has been accusing the Sarbananda Sonowal government of letting the BJP’s central leadership in Delhi run the show in Assam.

“You know about the five guarantees of the Congress. Let me guarantee a sixth, that the Mahajot [grand alliance] government will not let Assam be controlled by either Nagpur or Delhi if voted to power,” he told a meeting at Barkhetri in western Assam.

The party leads the 10-party Mahajot that includes perfume baron Badruddin Ajmal’s All India United Democratic Front.

Mr. Gandhi reiterated his party’s stand against the Citizenship (Amendment) Act.

“The people of Assam don’t want CAA, which is an attack on Assam. It will divide the State, destroy and spread hatred. Nobody can implement CAA in Assam and we will probe it after the elections.”

Nullifying the CAA is one of the five pre-poll guarantees of the Congress.

At another rally in Chhaygaon west of Guwahati, he slammed the BJP for surviving on the politics of hatred. He also warned the people of the saffron party’s ultimate goal of taking away Assam’s resources.

“The BJP’s target is to take away tea gardens, airports, oil fields and everything else and hand them over to a few of their corporate friends,” Mr. Gandhi said.

The Congress leader underlined the unemployment situation in the State, assuring the creation of 5 lakh government jobs in five years for the youth. He also assured free electricity up to 200 units per household, a monthly allowance of ₹2,000 for every homemaker and a daily wage of ₹365 for each tea worker in Assam.



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Opinion: Gujarat Dinner A Top-Class Teaching Moment From Both Pawar And Shah


Amit Shah’s statement that “not everything can be made public” is being interpreted as affirmation of the fact that on Saturday night, he met Sharad Pawar for dinner at the home of a billionaire in Gujarat.

Along with Pawar, who is 80, his deputy, Praful Patel, was also reportedly at the dinner diplomacy event.

Sources say that the police in Ahmedabad had been asked not to register the movements or make special arrangements for the Home Minister as he drove to the host’s mansion. Your columnist can confirm that the meeting took place. Pawar’s party denied it before Shah offered his comment. The menu was vegetarian. Pawar and his deputy reached the venue about 45 minutes before Shah interacted with their host, known for his proximity to PM Modi and Shah.

The dinner comes in the midst of raging political hormones in Maharashtra where Pawar’s man, Home Minister Anil Deshmukh, has been accused of corruption by the former police chief of Mumbai. The controversy threatens the Maharashtra government, which comprises an alliance of the Shiv Sena, the Congress and Pawar’s party.

The scandal began with the discovery of an SUV, containing gelatin sticks, ingredients for explosives, parked near the home of Reliance top boss Mukesh Ambani. Within days, the owner of the SUV was found dead in a creek. All this is now being pinned on controversial cop, Sachin Vaze, who had been ordered to collect 100 crores every month from businesses via extortion, the former police chief, Param Bir Singh, has alleged (he has also filed a court case demanding an investigation against the Home Minister). Meanwhile, Deshmukh has denied the allegations and Pawar’s party has said there is no need for him to resign. But Vaze has been arrested and the case is being handled by the country’s top anti-terror agency.

Amit Shah’s statement that “not everything can be made public” is being interpreted as affirmation of the fact that on Saturday night, he met Sharad Pawar for dinner.

As these developments were blaring through Maharashtra, it was Pawar whose rich reserves of political experience kept the government on an even keel, assuaging allies and fortifying the government against the attack by the opposition BJP.

Which is why the meeting with Amit Shah is such a wobbler for those who felt Pawar had managed to downgrade the emergency for the Maharashtra government from Code Red to Amber. Modi has made no secret of his close equation with Pawar, who regularly meets with him at parliament when it is in session. A few years ago, Modi in a public speech described Pawar as his “political guru”.

Pawar is famous for keeping his options open – even after he has committed his support to a party or a particular government. When the Maharashtra crisis began, he said Chief Minister Uddhav Thackeray had reason to order an inquiry against the Home Minister because the charges were serious; a day later, however, his party firmly declared that Deshmukh would not quit. As the BJP went into the full attack mode, Pawar reportedly counselled the Chief Minister not to concede an inch. Pawar is learnt to have said, “In the UPA the Congress had a bad habit of forcing resignations when the BJP demanded them. The BJP never makes any one resign. Let us not give an inch, or they will torch our government”.

The allies followed his advice. The spook seemed less scary. So why the dinner with Shah, then? Because Pawar operates at many levels and the Gujarat meal sends a strong message to his allies: Yes, it may be his party that has made them vulnerable, but he has options and can engage the affections of the BJP as an eager suitor. The Shah meeting makes it clear that in the Maharashtra alliance, it is Pawar that is the king: the Congress is a washout; Thackeray cannot reunite with the BJP whom he dumped to form the current alliance; but Pawar has no such impediments. It’s vintage power play, Pawar-style.

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Pawar’s signalling comes also as Sanjay Raut, Sena leader, wrote in a stinging editorial in the Sena mouthpiece that Deshmukh is an “accidental Home Minister”. The Sena and Congress want to move towards dropping Deshmukh as Home Minister, though not immediately, since that would be seen as giving in to the BJP’s demands. After Pawar’s dinner with Shah, Raut was ticked off and warned not to play “spoilsport” – this was done publicly by Pawar’s nephew, Ajit Pawar, who said the Maharashtra government is “working well”.

Clearly the Maharashtra government does not believe in TMI – Too Much Information – with its frequent squabbles erupting in sound bites to the press.

Pawar is keen to replace Sonia Gandhi as the UPA chairperson and revive what is fast turning into a defunct national opposition to the BJP. Pawar believes that this is possible only with a collective of regional parties since the Congress is dealing with its own implosion over whether it should continue to be led by the Gandhis.

Expect to see a series of big political moves after May 2 when the results will be announced from four big states and a Union territory. If the Congress performs badly in Assam and Kerala, where the Gandhi siblings have campaigned extensively, it’ll be knives out not just in the Congress but across the opposition spectrum. A senior Congress leader told me, “We are keenly missing Ahmed Patel who was the single-point negotiator with Pawar. In his absence, it is Kamal Nath, but these days, Pawar is behaving like Lord Shiva: he is both the creator (of the Maharashtra government) and the destroyer (feelers to the BJP).”

The Ahmedabad dinner has been served up as a teachable moment – not just by Pawar but also Shah, who has cleverly acknowledged the session to wobble the Maharashtra government. May will be hot – and anything but sleepy.

(Swati Chaturvedi is an author and a journalist who has worked with The Indian Express, The Statesman and The Hindustan Times.)

Disclaimer: The opinions expressed within this article are the personal opinions of the author. The facts and opinions appearing in the article do not reflect the views of NDTV and NDTV does not assume any responsibility or liability for the same.



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Kerala Assembly elections | Suresh Gopi’s statement reveals CoLeBi alliance in Kerala: Pinarayi Vijayan


BJP candidate Suresh Gopi had said that the IUML candidate K.N.A. Khader should win in Guruvayur and the LDF candidate A.N. Shamseer should be defeated in Thalassery

Chief Minister Pinarayi Vijayan said that the BJP, the Congress, the Indian Union Muslim League (IUML) and the UDF have struck a deal between them and BJP candidate Suresh Gopi’s statement makes it clear.

Mr. Gopi had said that the IUML candidate K.N.A. Khader should win in Guruvayur and the LDF candidate A.N. Shamseer should be defeated in Thalassery.

It only reveals a deal between the BJP, the Congress, the IUML and the UDF, Mr. Vijayan said while addressing a press conference in Kannur on March 29.

However, the League, the Congress or the UDF should not consider that the BJP’s open statement for IUML candidate’s win would benefit them.

Recalling BJP leader O. Rajagopal had earlier said that there were such moves locally and their party was benefiting from them, Mr. Vijayan said that when a deal is struck, the BJP ensures their advantage. Nemom is a proof of that, he added.

The IUML, the Congress and the UDF have accepted the agreement that the BJP would help them to win the constituency where they have good vote share. This reveals that help in Guruvayur, Thalassery and Devikulam constituencies, where the BJP has rejected its candidature, will be in other constituencies as well.

He said the deal between them was revealed much earlier, when the government in the Kerala Legislative Assembly passed a resolution ensuring that Kerala would not implement the Citizenship Law Amendment.

The Congress did not accept the government’s stand to be together to raise agitation against the amendment of the citizenship law. The UDF remained silent even when the Central government takes a wrong stand towards Kerala.

“The motive behind their mutual understanding is to subvert the achievements of Kerala. The League and the Congress are getting ready to go to extremes to get a few votes,” he said. This is the broadest form of the old CoLeBi (short form Congress-League-BJP ) alliance‌, he accused

While the Centre is trying to destabilise the country by using Central agencies, the Congress and the UDF are encouraging it

To a question that Jose K. Mani had said that there should be a check on the existence of ‘love jihad’ in Kerala, the CM said that he did not hear about it and the media should ask Mr. Mani about this.

When the Sabarimala issue was raised Mr. Vijayan said the media is working hard to create unnecessary controversy.



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नवाब मलिक ने शरद पवार से अमित शाह की मुलाकात का खंडन किया, भाजपा पर हमला बोला


महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और राकांपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक (फाइल फोटो)

मुंबई:

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और राकांपा (NCP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक (National Spokesperson Nawab Malik) ने पार्टी प्रमुख शरद पवार (Party chief Sharad Pawar) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के बीच मुलाकात का रविवार को खंडन किया. मलिक ने आरोप लगाया कि इस तरह की बातें करके “भ्रम” पैदा करना भाजपा का तरीका है. उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से झूठी जानकारी है जो कुछ लोगों ने भ्रम पैदा करने के लिए जानबूझकर फैलाई है. भाजपा कुछ भ्रम पैदा करना चाहती है. ऐसी कोई मुलाकात नहीं हुई है. पवार का शाह से मिलने का कोई कारण नहीं है.”

“हर बात को सार्वजनिक करना जरूरी नहीं”: शरद पवार से मुलाकात पर बोले अमित शाह

राजनीतिक गलियारों में इस तरह की अटकलें हैं कि शाह शनिवार को अहमदाबाद में शीर्ष उद्योगपति के आवास पर पवार और प्रफुल्ल पटेल से मिले हैं. शाह ने रविवार को दिल्ली में प्रेस वार्ता में कथित मुलाकात के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि हर चीज़ को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है.

Video: अहमदाबाद में मिले शरद पवार और अमित शाह? NCP ने बताया अफवाह

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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"हर बात को सार्वजनिक करना जरूरी नहीं": शरद पवार से मुलाकात पर बोले अमित शाह


महाराष्ट्र गठबंधन सरकार में संकट के बीच शरद पवार और अमित शाह की मुलाकात हुई है.

नई दिल्ली:

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने रविवार को सभी लोगों को उस वक्त उधेड़बुन में डाल दिया जब उनसे एनसीपी (NCP) नेता शरद पवार (Sharad Pawar) से मुलाकात के बारे में पूछा गया. शाह ने न तो इसकी पुष्टि की और न ही इससे इनकार किया. शाह ने कहा, सब कुछ सार्वजनिक किया जाना जरूरी नहीं है.

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कहा जा रहा है कि शनिवार को अहमदाबाद में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई है. शरद पवार की पार्टी एनसीपी महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी (Maha Vikas Aghadi) में शामिल है. राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को सियासत गरमाई हुई है. मुंबई के पूर्व पुलिस आय़ुक्त परमबीर सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. परमबीर सिंह को मुकेश अंबानी के मामले की जांच में गंभीर चूक के खुलासे के बाद पद से हटा दिया गया था. परमबीर सिंह ने देशमुख पर 100 करोड़ रुपये की वसूली का रैकेट चलने का आरोप लगाया है.

गुजरात के स्थानीय अखबार के मुताबिक, पवार और उनके पार्टी सहयोगी प्रफुल्ल पटेल ने अमित शाह से अहमदाबाद में शनिवार को एक फार्महाउस में मुलाकात की थी. शाह का यह रुख ऐसे वक्त महत्वपूर्ण है, जब बीजेपी ने महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के तीनों गठबंधन दल एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना पर अंबानी केस और देशमुख पर लगे आरोपों को लेकर दबाव बना रखा है.



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Kerala Assembly polls | HC turns down pleas of BJP, AIADMK candidates against rejection of nominations


The Kerala High Court on March 22 dismissed the pleas by NDA candidates in Thalassery, Guruvayur and Devikulam Assembly constituencies against the rejection of their nomination papers by the respective Returning Officers (ROs).

Justice N. Nagaresh, while dismissing their writ petitions challenging the action of the respective Returning Officers, observed that the court could not interfere with the decisions taken by ROs to reject the nominations papers for not meeting certain mandatory requirements.

The Election Commission, while taking objection to the pleas of the petitioners, submitted in a statement that any interference by the High Court at this stage would disrupt, stall, and upset the whole election process. In fact, the election had to be concluded as early as possible according to the time schedule and all controversial matters and disputes arising out of the election process should be postponed till after the election so that the election proceedings would not be unduly retarded or protracted. There could not be a two pronged attack: one by invoking the writ jurisdiction of the High Court and another by filing an election petition after the declaration of the elections, the Commission added.

The alleged improper rejection of nomination papers was a ground for declaring void an election of a candidate under section 100(1)(c) of the Representation of the Peoples Act, 1951. Once the nomination papers of a candidate is rejected, the Act provides only one remedy; i.e. filing of an election petition after the elections were over, the EC pointed out.

The petitions were filed by N. Haridas, BJP candidate in Thalassery Assembly constituency, Nivedida Subramanian, BJP candidate in Guruvayur Assembly constituency and Dhanalakshmi Marimuthu, AIADMK candidate in Devikulam constituency

While the nomination paper of Mr. Haridas was rejected on the ground that Form No. A did not bear the signature of BJP president J.P. Nadda, the nomination paper of Ms. Nivedida was rejected for Form No. B not bearing the signature of the BJP president.

In their petition, the candidates contended that the rejection of their nomination papers was unauthorised and arbitrary. They pointed out that the nomination papers could not be rejected solely on account of minor defects in Form No. A or B as per Rule 4 of the Conduct of Election Rules. It was true that when the nomination papers were submitted, some minor errors were noticed. While Form No. B submitted by the Guruvayur candidate contained the seal of the State Committee BJP, Form No. A had the authorisation issued by the national president in favour of the State president with his specimen signature. Though the significance of the party president was omitted in Form No. B it was provided in Form No. A.

Mr. Haridas pointed out that the only defect noted in Form A was that it did not have the signature of the national president. In fact, the petitioner had submitted revised Form No. A with the signature of the BJP national president. Therefore, the rejection of his nomination was illegal, he contended.

The AIADMK candidate contended that the Returning Officer could allow candidates to correct the mistakes in their nomination papers. In fact, the Election Commission was empowered to order the Returning Officers to make such corrections under Article 324C of the Constitution, she pointed out.



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Amit Shah Cancels Bengal Rally Citing Chopper Snag, Trinamool Mocks BJP


Amit Shah is on a two-day visit to Bengal, addressing back-to-back rallies.

Kolkata:

Campaigning in Bengal today, Home Minister Amit Shah canceled his first stop and delivered his speech virtually instead, blaming it on a technical snag in his helicopter. Mamata Banerjee’s Trinamool Congress claimed the “snag” was really a case of poor turnout.

“I was going to come here for campaigning. Unfortunately, my helicopter was damaged and I couldn’t come to see you,” Amit Shah said, addressing the rally in Jhargram via video from Kharagpur.

“My helicopter developed a snag but I won’t call it a conspiracy,” he added in an apparent dig at Chief Minister Mamata Banerjee, who alleged last week that her leg was crushed by the door of her SUV when a crowd pressed into it in Nandigram, and called it an “attack”.

Soon after, came the rebuttal. Addressing a rally in west Midnapur, Mamata Banerjee’s nephew Abhishek Banerjee said Jhargram was “easily” reachable by road. “Those who attend rallies in the afternoon in this heat, they don’t come to hear speeches. The home minister had a rally in Jhargram, he could not reach his meeting due to a technical snag. But the images I have seen from the rally where BJP national leaders are coming … local tea stalls in villages have more crowds than their rallies,” said the Trinamool MP, who has been targeted repeatedly by the BJP over nepotism.

The Trinamool Congress posted images of what it called thin crowds and empty chairs at the Jhargram rally site, which it said prompted the last-minute change of plans.

 The party also sent photos from Mamata Banerjee’s rally in Purulia with the caption: “Crowd that doesn’t suffer ‘Technical Snag’. Chief Minister Mamata Banerjee welcomed by a sea of crowd in Purulia’s Baghmundi.”

Amit Shah was to visit Jhargram, an important rural Bengal constituency, to launch a yatra to honour the role of Birsa Munda and other freedom fighters in the fight against British colonial rule. The BJP had spoken of a massive rally at Jhargram.

The Union Home Minister is on a two-day visit to Bengal, addressing back-to-back rallies as the BJP amps up its campaign for the election starting March 27.

The results will be announced on May 2.





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